विज्ञान भी मानता है इन मंदिरों का लोहा, रूप बदलती है मूर्ति

वैसे तो चमत्कार और रहस्य के कई किस्से आपने पढ़े और सुने होंगे, इन किस्सो में कुछ किस्से ऐसे भी होते जिन पर आंख बंद कर विश्वास कर लेना इतना आसान नही होता। लेकिन आज भी कई ऐसे मंदिर है, जिनके चमत्कार के आगे विज्ञान ने भी घुटने टेक दिए ,साथ इन मंदिरों के किस्से सुनकर आप भी चमत्कारों पर विश्वास करने पर मजबूर हो जाएंगे.

आमतौर पर हम सभी ने सुना है कि मंदिर में देवी-देवता के सामने घी या फिर तेल के दीपक जलाने से भगवान जल्द प्रसन्न होते है। लेकिन क्या आप जानते है कि हमारे देश में ही एक ऐसा मंदिर है जहां पर घी, तेल के दीपक नहीं बल्कि पानी का दीपक जलता है। पानी का नाम सुनते ही शायद आप सभी चौक सकते है कि ऐसा कैसे हो सकता है। जो जल दीपक को बुझा देता है उससे दीपक की ज्योत कैसे जल सकती है। लेकिन गड़ियाघाट वाली माता के मंदिर में आपको घी, तेल की जरुरत नहीं पड़ती। 

यहां मूर्ति बदलती है रूप, सुबह कन्या तो शाम में बुजुर्ग अवस्था 

दुनियाभर में अध्यात्म औऱ आस्था के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड राज्य में वैसे तो अनगिनत मंदिर हैं, लेकिन यहां एक ऐसा मंदिर भी है, जो इस राज्य की रक्षा करता है। इस मंदिर में प्रतिदिन आद्याशक्ति तीन रूपों में भक्तों को दिखाई देती है। वह प्रात:काल कन्या, दोपहर में युवती व शाम को वृद्धा का रूप धारण करती हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार भयंकर बाढ़ में कालीमठ मंदिर बह गया था। लेकिन धारी देवी की प्रतिमा एक चट्टान से सटी होने के कारण धारो गांव में बह कर आ गई थी। गांववालों को धारी देवी की ईश्वरीय आवाज सुनाई दी थी कि उनकी प्रतिमा को वहीं स्थापित किया जाए। जिसके बाद गांव वालों ने माता के मंदिर की स्थापना वहीं कर दी।

मान्यता है कि इस मंदिर में माँ काली की प्रतिमा द्वापर युग से ही स्थापित है। कालीमठ एवं काली मठों में माँ काली की प्रतिमा क्रोध मुद्रा में है, परन्तु धारी देवी मंदिर में काली की प्रतिमा शांत मुद्रा में स्थित है। हालांकि शांत मुद्रा में दिखने वाली धारी माता के गुस्से को दुनिया ने उस वक्त देखा, जब एकाएक देवभूमि पानी में समा गई थी। उत्तराखंड के गढ़वाल में रहने वालों का मानना है कि यह विपदा माता धारी देवी के प्रकोप के कारण आई। कहते हैं कि इस प्राचीन मंदिर से माता की मूर्ति के हटाने के कुछ घंटे बाद ही केदारनाथ में तबाही का मंजर आया और सैकड़ों लोग काल के गाल में समा गए।

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